डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जयंती पर सीएम धामी का संबोधन। Uttarakhand 24×7 Live news

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित 15 दिवसीय कार्यक्रमों की श्रृंखला के अंतर्गत आईआरडीटी सभागार, सर्वे चौक, देहरादून में आयोजित महानगर जिला कार्यकर्ता सम्मेलन में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके राष्ट्रवादी चिंतन, त्याग और राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान का स्मरण किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन राष्ट्र प्रथम की भावना को समर्पित था। वे केवल एक राजनेता ही नहीं, बल्कि महान शिक्षाविद्, दूरदर्शी विचारक और भारत की अखंडता के प्रखर प्रहरी थे। उन्होंने कहा कि मात्र 33 साल की आयु में कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बनने वाले डॉ. मुखर्जी ने देशहित को सर्वोपरि रखते हुए सार्वजनिक जीवन को राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित किया। स्वतंत्र भारत के प्रथम उद्योग मंत्री के रूप में उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया और बाद में राष्ट्रवादी विचारधारा को मजबूत आधार देने के उद्देश्य से साल 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना की, जो आज भारतीय जनता पार्टी के रूप में विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक दल है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का “एक देश में दो विधान, दो निशान और दो प्रधान नहीं चलेंगे” का संकल्प भारत की एकता और अखंडता के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक था। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाना डॉ. मुखर्जी के अधूरे स्वप्न को साकार करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है, जिसे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने सफलतापूर्वक पूरा किया। यह निर्णय उनके सर्वोच्च बलिदान को सच्ची श्रद्धांजलि है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और राष्ट्रीय गौरव को पुनर्स्थापित करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम का पुनर्विकास सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की उसी भावना का प्रतीक है, जिसके प्रबल समर्थक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी थे। उन्होंने कहा कि अंत्योदय, सबका साथ-सबका विकास, प्रत्येक गरीब को आवास, हर घर जल, आयुष्मान भारत और डिजिटल इंडिया जैसी योजनाएं भी उनके लोककल्याणकारी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने का कार्य कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार भी डॉ. मुखर्जी के विचारों को आत्मसात करते हुए समानता, सुशासन और जनकल्याण के मार्ग पर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना है, जिसने समान नागरिक संहिता लागू कर समान नागरिक अधिकारों की दिशा में ऐतिहासिक पहल की है। यह कानून किसी धर्म या समुदाय के विरुद्ध नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, लैंगिक समानता तथा सभी नागरिकों के लिए समान न्याय सुनिश्चित करने वाला कदम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक समरसता को बनाए रखने के लिए सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किया है। युवाओं के हितों की रक्षा के लिए देश का कड़ा नकल विरोधी कानून बनाया गया है, जिससे भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है। राज्य में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए दंगा रोधी कानून लागू किया गया है तथा अतिक्रमण के विरुद्ध चलाए गए अभियान के माध्यम से हजारों एकड़ सरकारी भूमि को भू-माफियाओं से मुक्त कराया गया है।

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