वनाग्नि पर नियंत्रण को जनसहभागिता जरूरी मंत्री। Uttarakhand 24×7 Live news

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वन विभाग उत्तराखंड द्वारा आज वनाग्नि सत्र 2026 में वनाग्नि नियंत्रण एवं प्रबंधन को लेकर वन विभाग स्थित मंथन सभागार में प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान मीडिया को संबोधित करते हुए वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि पृथ्वी के लगातार बढ़ते तापमान, लंबे समय तक सूखा, अनियमित मानसून, अल नीनो समेत अन्य कारणों से प्रदेश में वनाग्नि की घटनाओं में इजाफा हुआ है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश के टिहरी, चमोली, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जिलों में आग की घटनाएं अधिक देखने को मिली हैं। वन मंत्री ने कहा कि वनाग्नि नियंत्रण के लिए वन विभाग द्वारा उत्तराखंड शासन, विभिन्न संस्थाओं और स्थानीय लोगों के सहयोग से जनजागरूकता अभियान, प्रचार-प्रसार और नवाचारों के माध्यम से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि आग लगने की स्थिति में वीडियो बनाने की बजाय आग बुझाने में सहयोग करें, क्योंकि जनसहभागिता से ही वनाग्नि पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
वन मंत्री ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में प्रदेश में वनाग्नि की कुल 14 हजार 638 घटनाएं सामने आई हैं, जिनसे 23 हजार 682.77 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ। इन घटनाओं में 35 लोगों की मौत हुई जबकि 76 लोग घायल हुए। वहीं वर्ष 2026 में अब तक वनाग्नि की 394 घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें 331.12 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है और एक व्यक्ति की मृत्यु हुई है।
प्रेस वार्ता के दौरान वन मंत्री ने मीडिया से भी सहयोग की अपील करते हुए कहा कि वनाग्नि को लेकर अफवाह फैलाने से बचें और लोगों को जागरूक करने में अपनी भूमिका निभाएं।

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