राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का उत्तराखंड की रजत जयंती पर विधान सभा विशेष सत्र में सम्बोधन। Uttarakhand 24×7 Live news
इस समारोह में उपस्थित:
उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेन्ट जनरल गुरमीत सिंह
विधानसभा अध्यक्ष श खंडूरी भूषण
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ,
विपक्ष के नेता यशपाल आर्य ,
गणमान्य अतिथियो, देवियो और सज्जनो,
नमस्कार!
उत्तराखंड राज्य की स्थापना की रजत जयंती के ऐतिहासिक अवसर पर, लोकतन्त्र के इस मंदिर में, विधान सभा के विशेष सत्र में आप सबके बीच आकर मुझे बहुत प्रसन्नता हो रही है। इस अवसर पर मैं उत्तराखंड विधान सभा के पूर्व और वर्तमान सदस्यों तथा राज्य के सभी निवासियों को बधाई देती हूं।
श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी के प्रधानमंत्री के कार्यकाल के दौरान, यहां के जनमानस की आकांक्षा के अनुरूप, बेहतर प्रशासन और संतुलित विकास की दृष्टि से, वर्ष 2000 के नवंबर महीने में इस राज्य की स्थापना की गई।
यह बहुत प्रसन्नता की बात है कि विगत पचीस वर्षों की यात्रा के दौरान उत्तराखंड के लोगों ने विकास के प्रभावशाली लक्ष्य हासिल किए हैं। पर्यावरण, ऊर्जा, पर्यटन, स्वास्थ्य-सेवा और शिक्षा के क्षेत्रों में राज्य ने सराहनीय प्रगति की है। डिजिटल और भौतिक कनेक्टिविटी तथा इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
विकास के समग्र प्रयासों के बल पर राज्य में मानव विकास सूचकांकों के कई मानकों पर सुधार हुआ है। राज्य में साक्षरता बढ़ी है, महिलाओं की शिक्षा में विस्तार हुआ है, मातृ एवं शिशु मृत्यु-दर में कमी आई है तथा स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
महिला सशक्तीकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की मैं विशेष सराहना करती हूं। सुशीला बलूनी, बछेंद्री पाल, गौरा देवी, राधा भट्ट और वंदना कटारिया जैसी असाधारण महिलाओं की गौरवशाली परंपरा आगे बढ़े, यही अपेक्षा है।
ऋतु खंडूरी भूषण को राज्य की पहली महिला विधानसभा अध्यक्ष नियुक्त करके उत्तराखंड विधान सभा ने अपना गौरव बढ़ाया है। मैं चाहूंगी कि सभी हितधारकों के सक्रिय प्रयास से विधानसभा में महिलाओं की संख्या में वृद्धि हो।
माननीय सदस्यगण,
उत्तराखंड की यह देवभूमि अध्यात्म और शौर्य की परम्पराओं से ओतप्रोत है। भारत का यह पवित्र भूखंड अनेक ऋषि-मुनियों की तपस्थली रहा है। कुमाऊँ और गढ़वाल रेजीमेंट के नाम से ही यहां की शौर्य परंपरा का परिचय मिलता है। यहां के युवाओं में भारतीय सेना में सेवा करके मातृभूमि की रक्षा करने का उत्साह दिखाई देता है।
भारत की लोकतांत्रिक परंपरा को सशक्त बनाने में उत्तराखंड के अनेक जनसेवकों का योगदान रहा है।
हमारे संविधान निर्माताओं ने नागरिकों के लिए समान सिविल संहिता के निर्माण का प्रावधान अनुच्छेद 44 के तहत किया था। समान नागरिक संहिता विधेयक लागू करने से जुड़ी उत्तराखंड विधानसभा की पहल की मैं सराहना करती हूं।
मुझे बताया गया है कि उत्तराखंड विधानसभा में अब तक 550 से अधिक विधेयक पारित किए गए हैं — जिनमें उत्तराखंड लोकायुक्त विधेयक, उत्तराखंड जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था विधेयक तथा नकल विरोधी विधेयक प्रमुख हैं। पारदर्शिता, नैतिकता और सामाजिक न्याय से प्रेरित ऐसे विधेयकों के लिए मैं सभी विधायकों को बधाई देती हूं।
माननीय सदस्यगण,
विधान सभाएं हमारी संसदीय प्रणाली का प्रमुख स्तंभ हैं। डॉ. भीमराव आंबेडकर ने कहा था कि संसदीय प्रणाली की आत्मा निरंतर उत्तरदायित्व है। विधायक जनता और शासन के बीच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं।
एक विधायक के रूप में मुझे नौ वर्षों तक जनसेवा का अवसर मिला। अनुभव के आधार पर कह सकती हूं कि यदि विधायक सेवा-भाव से जनता के कल्याण में सक्रिय रहेंगे, तो जनता और जनप्रतिनिधि के बीच विश्वास का बंधन अटूट बना रहेगा।
मैं आपसे आग्रह करती हूं कि विकास और जनकल्याण के कार्यों को पूरी निष्ठा से आगे बढ़ाएं। समाज के वंचित वर्गों और युवाओं के विकास पर विशेष ध्यान दें।
मुझे यह जानकर प्रसन्नता है कि उत्तराखंड विधानसभा ने National Electronic Vidhan Application (NeVA) प्रणाली को अपनाया है और इसके माध्यम से दो सत्रों का संचालन किया जा चुका है। यह पहल ई-विधान के क्षेत्र में एक सराहनीय कदम है।
माननीय सदस्यगण,
उत्तराखंड में अनुपम प्राकृतिक संपदा और सौंदर्य विद्यमान हैं। इन उपहारों का संरक्षण करते हुए राज्य को सतत विकास के मार्ग पर आगे बढ़ाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
उत्तराखंड की 25 वर्ष की विकास यात्रा विधायकों के समर्पित योगदान से ही संभव हुई है। मुझे विश्वास है कि ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ की भावना के साथ आप सब राज्य और देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।
मैं उत्तराखंड के सभी निवासियों के स्वर्णिम भविष्य की मंगलकामना करती हूं।
