वसुंधरा ताल में लगेगा उत्तराखंड का पहला ग्लेशियल झील अर्ली वार्निंग सिस्टम। Uttarakhand 24×7 Live news

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उत्तराखंड में ग्लेशियल झीलों से संभावित ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF के खतरे से निपटने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। चमोली के वसुंधरा ताल में प्रदेश का पहला आधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित किया जाएगा। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने वैज्ञानिक और तकनीकी दल को सचिवालय से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

वसुंधरा ताल में स्थापित होने वाला सिस्टम अत्याधुनिक सेंसर, सैटेलाइट कम्युनिकेशन और रियल टाइम डेटा मॉनिटरिंग से लैस होगा। जलस्तर, मौसम, बर्फ की गहराई, तापमान, जल प्रवाह, झील के आसपास होने वाली हलचल और अन्य महत्वपूर्ण मानकों की लगातार निगरानी की जाएगी। सीबीआरआई रुड़की और वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के विशेषज्ञ इस अभियान को अंजाम देंगे। 29 सितंबर से 15 अक्टूबर तक चलने वाले अभियान में SDRF, NDRF और ITBP की टीमें भी सुरक्षा और लॉजिस्टिक सहयोग देंगी। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने उत्तराखंड में 344 ग्लेशियल झीलें चिन्हित हैं, जिनमें 13 को उच्च जोखिम वाली झीलों के रूप में चिह्नित किया गया है। इनमें से 6 झीलों का बाथीमेट्रिक सर्वे पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अभियान में शामिल वैज्ञानिकों और सुरक्षा बलों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वसुंधरा ताल में अर्ली वार्निंग सिस्टम की स्थापना आपदा तैयारियों को वैज्ञानिक और तकनीकी आधार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सेंसर से मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर संभावित असामान्य बदलावों की पहचान कर समय रहते अलर्ट जारी करने में मदद मिलेगी। वसुंधरा ताल से शुरू हो रही यह पहल भविष्य में अन्य संवेदनशील ग्लेशियल झीलों तक भी आधुनिक पूर्व चेतावनी तंत्र के विस्तार का आधार बनेगी।

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