रेलवे भूमि अतिक्रमण पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा फैसला। Uttarakhand 24×7 Live news
सुप्रीम कोर्ट का सख्त संदेश, रेलवे भूमि पर अवैध कब्जा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं
हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रेलवे की जमीन पर वर्षों से चले आ रहे अतिक्रमण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा फैसला सुनाया है जिसने साफ कर दिया है कि देश में कानून से ऊपर कोई नहीं है। अदालत ने दो टूक शब्दों में कहा कि जिस भूमि का स्वामित्व रेलवे के पास है, उस पर अवैध कब्जा नहीं रह सकता। यह निर्णय केवल एक शहर या एक राज्य तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण को वैध ठहराने की कोशिश अब नहीं चलेगी।
सुनवाई के दौरान यह दलील दी गई कि हजारों लोग वर्षों से वहां रह रहे हैं, लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया कि लंबे समय तक रहने से स्वामित्व का अधिकार नहीं मिल जाता। यदि जमीन रेलवे की है तो उसका उपयोग किस उद्देश्य से होगा, यह तय करने का अधिकार भी रेलवे के पास ही रहेगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि विकास कार्यों और सार्वजनिक हित को रोका नहीं जा सकता।
हालांकि अदालत ने मानवीय दृष्टिकोण को भी नजरअंदाज नहीं किया। जिन परिवारों को हटाया जाएगा, उनकी पहचान कर राज्य सरकार और रेलवे मिलकर छह महीने तक प्रति माह दो हजार रुपये की आर्थिक सहायता देंगे। साथ ही पात्र लोगों को सरकारी आवास योजनाओं के तहत आवेदन करने का अवसर दिया जाएगा, ताकि उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था मिल सके। लेकिन यह भी साफ कर दिया गया कि अवैध कब्जे को संरक्षण देने का कोई कानूनी आधार नहीं है।
इस फैसले के बाद यह बहस और तेज हो गई है कि देशभर में सरकारी जमीनों पर फैले अतिक्रमण पर कब और कैसे कार्रवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश उन सभी मामलों के लिए नजीर बन सकता है जहां सार्वजनिक संपत्ति पर अवैध कब्जे को वर्षों से अनदेखा किया जाता रहा है।
हल्द्वानी का यह मामला अब केवल एक स्थानीय विवाद नहीं रहा, बल्कि यह कानून बनाम अवैध कब्जे की बड़ी लड़ाई का प्रतीक बन गया है। अदालत ने साफ संकेत दिया है कि विकास, व्यवस्था और कानून की सर्वोच्चता से समझौता नहीं
