आईएएस और पीसीएस अधिकारियों के बड़े फेरबदल। Uttarakhand 24×7 Live news
उत्तराखंड शासन ने राज्य प्रशासनिक ढांचे में बड़ा फेरबदल करते हुए 21 आईएएस और पीसीएस अधिकारियों के तबादले किए हैं। शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह फेरबदल तत्काल प्रभाव से लागू होंगे। सरकार ने सचिवालय से लेकर जिलाधिकारियों तक कई महत्वपूर्ण पदों पर अधिकारियों की नई तैनाती की है।
जारी आदेश के मुताबिक, दिलीप जावलकर को सचिव न्याय विकास, ग्रामीण निर्माण विभाग, CPD और UGVs-REAP की जिम्मेदारी दी गई है। डॉ. बी.डी.आर.सी. पुन्हानी को निदेशक मसल्ला के पद पर नियुक्त किया गया है। चन्द्रेश कुमार यादव को सचिव राज्य विभाग व आयुष-खाद्य विभाग की जिम्मेदारी मिली है, जबकि ए.एस. सिंह बिष्ट को महानिदेशक कृषि उद्यान विभाग बनाया गया है।
सोनिका को उपाध्यक्ष हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण नियुक्त किया गया है। ललित मोहन रयाल को उपाध्यक्ष जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण नैनीताल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। विजय कुमार जोंगड़े को अपर सचिव राजस्व विभाग के पद पर तैनात किया गया है, वहीं सुश्री नन्दा को महानिदेशक कृषि उद्यान विभाग नैनीताल भेजा गया है।
हिमांशु खुराना अब अपर सचिव भूमि विभाग में कार्य करेंगे। अनुराधा पाल को अपर सचिव चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग का दायित्व सौंपा गया है। आलोक कुमार पांडेय को मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीएमजीएसवाई तथा अपर सचिव सूचना प्रौद्योगिकी विभाग बनाया गया है,गौरव कुमार को जिलाधिकारी चमोली, जबकि डॉ. संदीप तिवारी को जिलाधिकारी चंपावत नियुक्त किया गया है। स्वाति सोनी को अपर सचिव समाज कल्याण एवं आयुष-ग्रामीण विकास विभाग में भेजा गया है। विनोद मिरे गोसावी को अपर सचिव शहरी विकास विभाग देहरादून का कार्यभार दिया गया है।
आशीष कुमार भट्ट को जिलाधिकारी बागेश्वर के पद पर यथावत रखा गया है। प्रकाश चन्द्र को अपर सचिव समाज कल्याण विभाग तथा प्रबंध निदेशक वित्त विकास निगम बनाया गया है। वहीं गीतांजलि सिंह को महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा एवं निदेशक उद्यान विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इस व्यापक फेरबदल के साथ सरकार ने जिलों में प्रशासनिक कार्यकुशलता और विकास कार्यों में तेजी लाने का संकेत दिया है। सचिवालय स्तर पर भी अनुभवी अधिकारियों को महत्वपूर्ण विभागों में जिम्मेदारी देकर शासन ने नीति-निर्माण और क्रियान्वयन की प्रक्रिया को और मजबूत करने की कोशिश की है।राज्य में हुए इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल को शासन की एक रणनीतिक पहल माना जा रहा है। इससे न केवल जिलों में नई ऊर्जा और जवाबदेही आने की उम्मीद है, बल्कि सचिवालय स्तर पर भी नीतिगत निर्णयों में गतिशीलता बढ़ने की संभावना है।
