गैरसैंण विधानसभा सत्र में पूर्व सीएम भुवन चंद्र खण्डूड़ी और पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट को श्रद्धांजलि, सदन ने किया योगदान याद। Uttarakhand 24×7 Live news

0
Videoshot_20261027_190626.jpg

भराड़ीसैंण गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में पंचम विधानसभा के वर्ष 2026 के तृतीय सत्र का शुभारंभ आज राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के साथ हुआ। उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण की अध्यक्षता में आयोजित दो दिवसीय सत्र के प्रथम दिन प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ राजनेता मेजर जनरल सेवानिवृत्त भुवन चंद्र खण्डूड़ी जी तथा पूर्व कैबिनेट मंत्री स्व. हीरा सिंह बिष्ट जी के निधन पर सदन में शोक व्यक्त किया गया।

पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खण्डूड़ी जी के निधन पर सदन में उपस्थित विधायकों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके व्यक्तित्व, कृतित्व, राजनीतिक जीवन और प्रदेश के विकास में दिए गए योगदान को याद किया।

सर्वप्रथम नेता सदन एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मेजर जनरल भुवन चंद्र खण्डूड़ी जी के जीवन, सैन्य सेवाओं और राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए उनके योगदान को सदन के समक्ष रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि भुवन चंद्र खण्डूड़ी जी का संपूर्ण जीवन अनुशासन, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र एवं जनसेवा के प्रति समर्पण का प्रेरणादायी उदाहरण रहा है।

मुख्यमंत्री ने केंद्र में पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी के नेतृत्व वाली सरकार में भुवन चंद्र खण्डूड़ी जी की महत्वपूर्ण भूमिका को याद करते हुए कहा कि उन्होंने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में स्वतंत्र प्रभार के राज्य मंत्री तथा बाद में मुख्यमंत्री के रूप में देश की सेवा की। उनके कार्यकाल में राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना को गति मिली। स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना तथा उत्तर-दक्षिण एवं पूर्व-पश्चिम गलियारा जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के क्रियान्वयन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। देश में आधुनिक राजमार्गों के विस्तार और सड़क संपर्क व्यवस्था को मजबूत बनाने में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल को भी याद करते हुए कहा कि भुवन चंद्र खण्डूड़ी जी ने प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता, प्रशासनिक जवाबदेही और विकास को प्राथमिकता दी। उनके नेतृत्व में सड़क एवं आधारभूत ढांचे के विकास के साथ-साथ जनहित से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति, अनुशासित कार्यशैली और स्पष्ट निर्णय लेने की क्षमता ने प्रदेश की राजनीति एवं प्रशासन में एक अलग पहचान बनाई।

वहीं, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने भी सदन में मेजर जनरल भुवन चंद्र खण्डूड़ी जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल और प्रदेश के विकास में उनके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि खण्डूड़ी जी का राजनीतिक एवं प्रशासनिक जीवन सादगी, ईमानदारी और जनसेवा के प्रति समर्पण का उदाहरण रहा है। उनके द्वारा लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय और प्रदेश के लिए किए गए कार्य सदैव याद किए जाएंगे।

विधायक चकराता प्रीतम सिंह ने भी सदन में मेजर जनरल भुवन चंद्र खण्डूड़ी जी से जुड़ी अपनी यादें साझा कीं। उन्होंने उनके व्यक्तित्व, कार्यशैली और प्रशासनिक दृढ़ता का उल्लेख करते हुए कहा कि खण्डूड़ी जी अपने कठोर एवं सशक्त निर्णयों के लिए जाने जाते थे। जनहित और प्रदेश के हित में निर्णय लेते समय वे किसी भी प्रकार के दबाव में नहीं आते थे। उनकी स्पष्टवादिता, दृढ़ इच्छाशक्ति और अनुशासन उनकी विशेष पहचान थी। उन्होंने कहा कि भुवन चंद्र खण्डूड़ी जी की कार्यशैली और उनके द्वारा लिए गए निर्णयों ने उत्तराखंड की राजनीति एवं प्रशासन पर अमिट छाप छोड़ी है।

विधायक मोहम्मद शहजाद ने भी मेजर जनरल भुवन चंद्र खण्डूड़ी जी के वर्ष 2007 से 2012 तक के मुख्यमंत्री कार्यकाल का उल्लेख करते हुए उनके साथ जुड़ी यादों को सदन में साझा किया। उन्होंने विशेष रूप से खण्डूड़ी जी की ईमानदारी और उनकी कार्यशैली को याद किया। उन्होंने कहा कि उनकी ईमानदारी की पराकाष्ठा, सिद्धांतों के प्रति अडिग रहने का स्वभाव और प्रशासनिक निर्णय लेने की क्षमता उन्हें अन्य नेताओं से अलग पहचान प्रदान करती थी।

विधायक अरविंद पांडे ने मेजर जनरल भुवन चंद्र खण्डूड़ी जी को याद करते हुए उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान वर्ष 2007 में हुए बाजपुर उपचुनाव का उल्लेख किया। उन्होंने उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों और खण्डूड़ी जी से जुड़ी स्मृतियों को सदन के समक्ष साझा करते हुए उनके नेतृत्व एवं राजनीतिक व्यक्तित्व को याद किया।

कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने भी मेजर जनरल भुवन चंद्र खण्डूड़ी जी के योगदान को याद करते हुए लैंसडाउन में गढ़वाल राइफल्स के जवानों के बच्चों के लिए बॉयज हॉस्टल निर्माण हेतु भूमि उपलब्ध करवाने के उनके प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सेना और सैनिक परिवारों के प्रति खण्डूड़ी जी का विशेष लगाव था। सैनिकों एवं उनके परिवारों के हितों के लिए किए गए उनके प्रयास सदैव याद किए जाएंगे।

विधायक आदेश चौहान ने वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए उस समय चर्चित रहे नारे ‘खण्डूड़ी है जरूरी’ को याद किया। उन्होंने खण्डूड़ी जी के कार्यकाल, उनकी लोकप्रियता, निर्णय लेने की क्षमता और प्रदेश की राजनीति में उनके प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका व्यक्तित्व और कार्यशैली उत्तराखंड की राजनीतिक यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं।

विधायक बृज भूषण गैरोला ने मेजर जनरल भुवन चंद्र खण्डूड़ी जी के उत्तराखंड राज्य आंदोलन में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका से लेकर राज्य गठन के बाद प्रदेश के विकास में उनके योगदान को विस्तार से याद किया। उन्होंने कहा कि खण्डूड़ी जी ने पर्वतीय क्षेत्रों के विकास को विशेष प्राथमिकता दी। उनके कार्यकाल में पहाड़ों तक सड़क संपर्क, संचार व्यवस्था और पेयजल सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ केंद्रीय विद्यालय जैसी महत्वपूर्ण शैक्षणिक सुविधाओं को आगे बढ़ाने के प्रयास किए गए। उन्होंने कहा कि खण्डूड़ी जी का दृष्टिकोण सदैव पर्वतीय क्षेत्रों के समग्र विकास और दूरस्थ क्षेत्रों तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने का रहा।

कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं विधायक बंशीधर भगत सहित सदन में उपस्थित अन्य मंत्रियों एवं विधायकों ने भी मेजर जनरल भुवन चंद्र खण्डूड़ी जी एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री स्व. हीरा सिंह बिष्ट जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी ने दोनों दिवंगत नेताओं के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन तथा प्रदेश के प्रति उनके योगदान को याद किया।

इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण ने भी दोनों दिवंगत नेताओं के प्रति सदन की भावनाओं को सम्मानपूर्वक स्थान दिया। सदन में विभिन्न दलों के विधायकों द्वारा व्यक्त किए गए विचारों में दोनों नेताओं के सार्वजनिक जीवन, जनसेवा और प्रदेश के प्रति उनके योगदान को याद किया गया।

भराड़ीसैंण में आयोजित पंचम विधानसभा के तृतीय सत्र का प्रथम दिवस प्रदेश के दो वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों को श्रद्धांजलि अर्पित करने और उनके सार्वजनिक जीवन में दिए गए योगदान को स्मरण करने के साथ संपन्न हुआ। सदन में विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्यों द्वारा मेजर जनरल भुवन चंद्र खण्डूड़ी जी के जीवन के अलग-अलग पहलुओं का स्मरण करना उनके व्यापक व्यक्तित्व, लोकप्रियता और उत्तराखंड के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed