उत्तराखंड में SIR पर सियासत गरम, धामी के निशाने पर कांग्रेस। Uttarakhand 24×7 Live news
उत्तराखंड में SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सियासत लगातार गरमाती जा रही है।
एक तरफ चुनाव आयोग के भीतर कथित असहमति और SIR को लेकर उठ रहे सवालों पर विपक्ष सवाल खड़े कर रहा है…तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चुनाव आयोग के आधिकारिक स्पष्टीकरण को सामने रखते हुए कांग्रेस पर ही सवाल दाग दिए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्यमंत्री आवास के मुख्य सेवक सदन, में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि भारत के मजबूत लोकतंत्र का आधार देश की संवैधानिक संस्थाएं हैं और चुनाव आयोग भी देश की स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है। धामी ने साफ कहा
आंतरिक टिप्पणी को अंतिम फैसला और किसी आपत्ति को संस्थागत टूट के तौर पर पेश करना सही नहीं है। साथ ही मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी के नकल माफिया वाले बयान, हल्द्वानी प्रकरण, जमीन के आरोप और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े बयानों को लेकर भी कांग्रेस पर जमकर पलटवार किया। इसी पर देखिए हमारी एक खास रिपोर्ट…
उत्तराखंड की सियासत में एक बार फिर चुनावी लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं का मुद्दा केंद्र में है। मंच मुख्यमंत्री आवास का था…मुद्दा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का…और निशाने पर कांग्रेस। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि भारत के मजबूत लोकतंत्र की बुनियाद संवैधानिक संस्थाएं हैं और चुनाव आयोग देश की स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है। धामी ने 26 सितंबर को हुई चुनाव आयोग की पूर्ण आयोग बैठक और उसके बाद जारी आधिकारिक नोट का हवाला देते हुए कहा कि SIR से जुड़े अंतिम निर्णय पूरे आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए। चुनाव आयोग ने 26 सितंबर के अपने स्पष्टीकरण में SIR, Form-6 से जुड़े निर्णयों को सर्वसम्मति से लिया गया बताया है और साथ ही ECINet की स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा का फैसला भी किया है।
SIR पर चुनाव आयोग का पक्ष
24 जून 2025 का मूल SIR आदेश — आयोग के मुताबिक सर्वसम्मति से राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की SIR समय-सारिणी — सर्वसम्मति से
Form-6 declaration पर आयोग की स्थिति स्पष्ट
Unmapped/Logical discrepancy मामलों में BLO घर जाकर दस्तावेज लेंगे
जरूरतमंदों के लिए हेल्प डेस्क और विशेष शिविर
ECINet की स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा
लेकिन इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या चुनाव आयोग के भीतर मतभेद थे? एक रिपोर्ट में चुनाव आयुक्तों की ओर से SIR से जुड़े कई मुद्दों पर आपत्तियां दर्ज किए जाने का दावा सामने आया था। इसके बाद 26 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की पूर्ण आयोग बैठक हुई। बैठक के बाद आयोग ने कहा कि SIR से जुड़े अंतिम आदेश सर्वसम्मति से लिए गए। यानी विवाद अब सिर्फ SIR की प्रक्रिया तक सीमित नहीं…बल्कि चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया और पारदर्शिता तक पहुंच चुका है। इसीलिए आयोग ने भविष्य में बैठकों का एजेंडा पहले सर्कुलेट करने और बैठकों के मिनट्स जारी करने का फैसला भी किया है।
लोकतंत्र में प्रश्न अवश्य पूछे जाने चाहिए… तथ्य हेडलाइन से नहीं, पूरी फाइल और अंतिम संस्थागत निर्णय से तय होने चाहिए।
मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के 27 मई 2026 के फैसले का भी हवाला दिया। सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक निर्णय सारांश के मुताबिक बिहार में SIR को लेकर आयोग की वैधानिक शक्ति को बरकरार रखा गया और अदालत ने इसे संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व कानून की संबंधित व्यवस्था से जोड़कर वैध माना। यानी धामी का तर्क है कि SIR की संवैधानिक और वैधानिक स्थिति को लेकर तस्वीर स्पष्ट है। साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड unmapped या logical discrepancy वाले हैं, उन्हें सामान्य तौर पर व्यक्तिगत सुनवाई के लिए दफ्तर नहीं बुलाया जाएगा। BLO उनके घर जाकर दस्तावेज हासिल करेंगे। रैन बसेरों में रहने वाले लोगों, श्रमिकों, गरीब और बेघर नागरिकों के लिए हेल्प डेस्क और विशेष शिविर लगाए जाएंगे।और पहली बार मतदाता बनने वाले तथा छूटे हुए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए भी विशेष अभियान चलाया जाएगा। उत्तराखंड के CEO कार्यालय की वेबसाइट पर भी SIR-2026 के लिए अलग पोर्टल, ड्राफ्ट रोल, प्रेस नोट और बैठक संबंधी दस्तावेज उपलब्ध हैं।
ECINET पर भी बड़ा फैसला
सवाल: क्या ECINet कानून और नियमों के मुताबिक काम कर रहा है? जांच समिति में—
सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर की अध्यक्षता
IIT/IIIT के स्वतंत्र विशेषज्ञ की भागीदारी
सिस्टम की तकनीकी समीक्षा
SIR के बाद दूसरा बड़ा मुद्दा बना…ECINet। इस डिजिटल सिस्टम को लेकर उठे सवालों के बीच चुनाव आयोग ने स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा का फैसला किया है। मतलब…विपक्ष सवाल उठा रहा है तो आयोग ने तकनीकी जांच का रास्ता भी खोला है।और यही वह बिंदु है जिसे मुख्यमंत्री ने संस्थागत पारदर्शिता की दिशा में उठाया गया कदम बताया।
लेकिन मुख्यमंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस सिर्फ SIR तक सीमित नहीं रही। उत्तराखंड में भर्ती परीक्षाओं और नकल माफिया के मुद्दे पर भी मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी के बयान पर पलटवार किया। धामी ने कहा कि प्रदेश में नकल के खिलाफ लगातार कार्रवाई हुई है और सरकार के अनुसार 100 से ज्यादा आरोपियों को जेल भेजा गया है। मुख्यमंत्री ने सख्त नकल विरोधी कानून और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया का भी हवाला दिया।सरकार की ओर से पिछले साढ़े चार-पांच वर्षों में 35 हजार से ज्यादा युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति दिए जाने का दावा किया गया है। जुलाई में राज्यपाल भवन की आधिकारिक विज्ञप्ति में भी मुख्यमंत्री ने पांच वर्षों में 34 हजार से ज्यादा नियुक्तियों की बात कही थी। युवाओं के भविष्य जैसे संवेदनशील विषय पर राजनीतिक आरोप लगाने से पहले तथ्यों को देखना
इसके बाद मुख्यमंत्री ने हल्द्वानी प्रकरण का भी जिक्र किया।
धामी ने कहा कि किसी घटना को जातीय नजरिए से देखने से पहले उससे जुड़े तथ्यों की जांच जरूरी है। उनका कहना था कि उत्तराखंड की पहचान सामाजिक समरसता, भाईचारे और सभी वर्गों के परस्पर सम्मान की रही है।हल्द्वानी के शुद्धिकरण विवाद के बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक टकराव पहले ही तेज हो चुका है। इस मामले को लेकर कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन किया था और राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज FIR को लेकर भी राजनीतिक विवाद सामने आया। अब मुख्यमंत्री ने साफ संदेश दिया—जाति और वर्ग के आधार पर उत्तराखंड को बांटने की राजनीति नहीं होनी चाहिए।
उत्तराखंड को जाति और वर्ग के आधार पर बांटने की राजनीति नहीं होनी चाहिए… देवभूमि की सामाजिक एकता हमारी सबसे बड़ी शक्ति है।
जमीन के मुद्दे पर भी मुख्यमंत्री ने विपक्ष को सीधी चुनौती दी।
कांग्रेस के आरोपों पर मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर जमकर पलटवार करते हुए ने कहा कि अगर सरकार या किसी सरकारी संस्था द्वारा नियमों के खिलाफ जमीन बेचे जाने या दिए जाने का कोई प्रमाण है…तो उसे सार्वजनिक किया जाए।
सिर्फ आरोप दोहराने से वह तथ्य नहीं बन जाता।विपक्ष तथ्य सामने रखे, सरकार प्रत्येक तथ्यात्मक सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के आखिर में मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर कहा कि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिवंगत माता से जुड़े हालिया राजनीतिक विवाद…राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल पर राहुल गांधी की टिप्पणी…और देश के पहले CDS जनरल बिपिन रावत से जुड़े राजनीतिक बयानों का जिक्र करते हुए धामी ने कहा कि राजनीतिक असहमति अपनी जगह है…लेकिन सार्वजनिक जीवन में भाषा और मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए। धामी ने कहा कि देश की सुरक्षा में योगदान देने वाले लोगों और दिवंगत व्यक्तियों के संदर्भ में
राजनीतिक विमर्श में सम्मान और संवेदनशीलता बनाए रखना जरूरी है।
धामी के निशाने पर कांग्रेस
SIR विवाद
नकल माफिया
हल्द्वानी विवाद
जमीन के आरोप
अजीत डोभाल पर बयान
जनरल बिपिन रावत से जुड़े
बयान
प्रधानमंत्री की राहुल गांधी से तुलना का मामला
और फिर मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के राजनीतिक प्रदर्शन पर भी सवाल उठाया। सीएम धामी ने कहा कि चुनावी हार का कारण कभी EVM और कभी संवैधानिक संस्थाओं को बताने के बजाय कांग्रेस को अपने राजनीतिक और संगठनात्मक प्रदर्शन का आत्ममंथन करना चाहिए। हालांकि यह मुख्यमंत्री का राजनीतिक आरोप है—जिसका जवाब कांग्रेस की ओर से अलग-अलग मौकों पर चुनावी प्रक्रिया, SIR और सरकार के कामकाज को लेकर दिया जाता रहा है। लोकतंत्र में अंततः जनता का विश्वास ही सबसे बड़ी कसौटी है।
एक तरफ चुनाव आयोग अपने अंतिम निर्णयों को सर्वसम्मत बता रहा है और प्रक्रिया में कुछ नई सुविधाएं और तकनीकी समीक्षा जोड़ रहा है…तो दूसरी तरफ विपक्ष की ओर से आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग के पक्ष को सामने रखते हुए कांग्रेस पर एक साथ कई मुद्दों पर न सिर्फ पलटवार किया
बल्कि कांग्रेस पर कई गंभीर आरोप भी लगाए,SIR से लेकर नकल माफिया…हल्द्वानी से जमीन…और राहुल गांधी के बयानों से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ ही पीएम और राहुल गांधी की तुलना से जुड़े मुद्दों तक…यानी उत्तराखंड में सियासत का तापमान बढ़ा हुआ है। और आने वाले दिनों में सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा—
क्या SIR का विवाद सिर्फ मतदाता सूची तक सीमित रहेगा…या उत्तराखंड की सियासत में 2027 की चुनावी लड़ाई का बड़ा मुद्दा बन जाएगा
