1320 मेगावाट बिजली खरीद पर ऊर्जा सचिव का स्पष्टीकरण। Uttarakhand 24×7 Live news
1320 मेगावाट थर्मल पावर की प्रस्तावित बिजली खरीद को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रमुख सचिव ऊर्जा डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने तथ्यात्मक स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा कि बिजली खरीद की पूरी प्रक्रिया नियमों, प्रतिस्पर्धी निविदा और उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग यानी UERC की मंजूरी के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।
प्रमुख सचिव ऊर्जा के मुताबिक RFQ चरण में पांच कंपनियां योग्य पाई गई हैं और आगे RFP प्रक्रिया में भी प्रतिस्पर्धा कायम है। अंतिम चयन कुल टैरिफ के आधार पर किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि 1320 मेगावाट बिजली की व्यवस्था राज्य की 25 वर्षों की दीर्घकालिक बेस-लोड जरूरत को ध्यान में रखकर की जा रही है। संयंत्र देश में किसी भी उपयुक्त स्थान पर लगाया जा सकता है, हालांकि उत्तराखंड में संयंत्र लगाने पर भी कोई रोक नहीं है।
Fixed Charge की सीमा 70 से बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह बदलाव बोलीदाताओं की लागत और ईंधन की उपलब्धता को ध्यान में रखकर प्रस्तावित किया गया था, जिसे UERC ने जांच के बाद मंजूरी दी। अंतिम वित्तीय प्रभाव कुल टैरिफ पर निर्भर करेगा।
प्रमुख सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि 25 वर्षों में अनुमानित करीब 1.60 से 1.66 लाख करोड़ रुपये का भुगतान एकमुश्त नहीं, बल्कि पूरी अनुबंध अवधि का संभावित कुल भुगतान है।
उन्होंने कहा कि UJVNL-THDC संयुक्त उपक्रम के विकल्प पर भी विचार किया गया था, लेकिन आवश्यक परिस्थितियां पूरी नहीं होने के कारण प्रतिस्पर्धी निविदा का रास्ता अपनाया गया। पहली यूनिट 42 महीने और दूसरी यूनिट 48 महीने में उपलब्ध कराने की समयसीमा प्रस्तावित है।
प्रमुख सचिव ऊर्जा ने कहा कि बिजली खरीद प्रक्रिया का उद्देश्य किसी एक कंपनी को लाभ पहुंचाना नहीं, बल्कि राज्य की भविष्य की बिजली जरूरत को सुरक्षित करना है और अंतिम फैसला प्रतिस्पर्धी बोली के आधार पर ही होगा
