“यूसैक में एक दिवसीय कार्यशाला: RS, GIS, AI व ड्रोन तकनीक से महिलाओं को सशक्त बनाने पर जोर। Uttarakhand 24×7 Live news

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यूसैक सभागार मे आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला का उद्देश्य महिलाओं को अंतरिक्ष तकनीक RS,GIS, आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस एवं ड्रोन तकनीक जैसी आधुनिक तकनीक से जोड़ कर उन्हे शैक्षणिक एवं व्यावसायिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाना है । कार्यशाला मे अतिथियों के रूप मे महिला आयोग कि अध्यक्ष कुसुम कंडवाल, डॉ मीरा तिवारी- पूर्व निदेशक, वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान,देहारादून, शिक्षाविद- प्रो० रीमा पंत, एवं वैज्ञानिक डॉ। पूनम गुप्ता ने प्रतिभाग किया । कार्यक्रम के शुभारंभ आमंत्रित अतिथियों एवं केंद्र के निदेशक प्रो० दुर्गेश पंत ने दीप प्रज्वलन कर किया । केंद्र कि वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ अरुण रानी द्वारा स्वागत सम्बोधन प्रस्तुत करते हुए RS,GIS, AI और ड्रोन तकनीक महिलाओं को किस प्रकार सशक्त बना रही हैं, इस विषय पर प्रस्तुतकरण दिया ।
कार्यशाला मे यूसैक के निदेशक एवं महानिदेशक यौकॉस्ट- प्रोo दुर्गेश पंत ने कहा कि वर्तमान समय मे आधुनिक तकनीक के माध्यम से महिलाओं के लिए रोजागर, नवाचार, कौशल विकास एवं नेत्रत्व के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं । आधुनिक युग में तकनीक ने समाज के हर क्षेत्र को प्रभावित किया है, विशेष रूप से महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र मे तकनीक सेक मजबूत माध्यम बन कर उभरी है ।सूचना संचार प्रोधोगिकी,इंटरनेट,डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म,और सोशल मीडिया ने महिलाओं को नई पहचान, अवसर और आत्मनिर्भरता प्रदान कि है । AI आधारित प्लेटफ़ॉर्म महिलाओं को रोजगार और कौशल विकास के नए अवसर प्रदान कर रहे हैं ।मोबाइल हेल्थ ऐपस, टेलीमेडिसिनऔर अनलाइन परामर्श से महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाएंआसानी से मिल रही हैं, साथ ही सेफ़्टी ऐपस, GPS और हेल्पलाइन नंबर महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत कर रहे हैं ।

कार्यशाला कि मुख्या अतिथि उत्तराखंड राज्य महिला आयोग कि अध्यक्ष, कुसुम कंडवाल ने संबोधित करते हुए कहा कि, महिला सशक्तिकरण का अर्थ है महिलाओं को निर्णय निर्माण,नेत्रत्व और शासन के हर स्तर पर समान अवसर,अधिकार और संसाधन उपलब्ध कराना । प्रशासनिक सेवाओं और लीडरशिप मे महिलाओं की भागीदारी न केवल लैंगिक समानता को बढ़ती है,बल्कि शासन की गुणवत्ता,संवेदनशीलता और प्रभाववशीलता को भी सुदृढ़ करती है । वर्तमान समय मे प्रशासनिक सेवाओं एवं राजनीतिक क्षेत्र मे महिलाओं कि बढ़ती उपस्थिती से नीति-निर्माण मे शिक्षा,स्वास्थ्य,पोषण,महिला-बाल सुरक्षा और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को प्राथमिकता मिली है। आधुनिक तकनीकी के माध्यम से वर्तमान समय मे सोशल मेडिया और डिजिटल मंचों के माध्यम से महिलायें अपने अधिकारों ,समस्याओं और उपलब्धियों को खुलकर व्यक्त कर पा रही हैं, यह मंच सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठाने का सशक्त माध्यम बना है ।

कार्यशाला के अतिविशिस्ट अतिथि मशहूर फिल्म अभिनेता, दिलीप ताहिल ने अपने सम्बोधन मे कहा कि फिल्मी दुनिया मे तकनीकी विकास ने महिलाओं को सशक्त बन्नाने मे यहां भूमिका निभाई है । डिजिटल कमेरा ,एडिटिंग सॉफ्टवेयर,विएफ़एक्स और ओटीटी प्लाटफॉर्म्स ने महिलाओं को निर्देशक,लेखक,सिनेमेटोग्राफर,और निर्माता के रूप मे नए अवसर दिए हैं। तकनीकी के माध्यम से अब महिलाये अपनी कहानियाँ स्वयं कह रहीं हैं और पारंपरिक सीमाओं से बाहर आकार सशक्त महिला पात्रों को दर्शकों तक पहुँच रही हैं। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म ने उनकी आवाज को वैश्विक पहचान दिलाई है ,जिससे फिल्म जगत मे लैंगिक समानता को बढ़ावा मिल है ।

विशिस्ट अतिथि, वैज्ञानिक डॉ पूनम गुप्ता ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि तकनीकी के माध्यम से ऑनलाइन शिक्षा, ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म,डिजिटल क्लासरूम और मोबाइल ऐप्प के माध्यम से आज महिलाओं तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुँच आसान बनाई है। दूर-दराज क्षेत्र कि महिलायें भी अब घर बैठे कौशल विकास और उच्च सिक्षा प्राप्त कर सकती है ।

विशिस्ट अतिथि, शिक्षाविद प्रोo रीमा पंत ने कहा कि आज के तकनीकी युग मे डिजिटल प्लेटफॉर्म महिलाओं को अपनी आवाज उठाने,नेटवर्क बनाने और नेत्रत्व मे आगे बढ़ने का अवसर देते हैं । ई- गवर्नेंस और सोशल मीडिया के जरिए महिलायें नीति-निर्माण और सामाजिक बदलाव मे सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं । उन्होंने कहा कि तकनीक महिला सशक्तिकरण की कुंजी है, यदि समान पहुँच ,प्रशिक्षण और सुरक्षा सुनिश्चितकी जाए तो तकनीक के माध्यम से महिलायें आत्मनिर्भर, सशक्त और नेत्रत्वकारी भूमिका मे उभर सकती है जो समावेशी और सात विकास के लिए महत्वपूर्ण है । कार्यशाला मे डी०ए०वी० पी०जी० कॉलेज कि एन०सी०सी० कि छात्राएं, एवं महिला प्रोधोगिकी संस्थान ,देहारादून कि छात्राएं तथा यूसैक के वैज्ञानिक कार्मिक एवं शोधार्थी उपस्थित रहे ।

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